EMI कैलकुलेटर
होम लोन, कार लोन और व्यक्तिगत ऋण के लिए मुफ्त EMI कैलकुलेटर।
₹
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साल
महीने
मासिक EMI
₹8,678
प्रति माह
मूलधन राशि
₹10,00,000
कुल ब्याज
₹10,82,776
कुल भुगतान
₹20,82,776
भुगतान विवरण
मूलधन: 48.0%ब्याज: 52.0%
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अंतिम अपडेट: जनवरी 2026
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
EMI की गणना कैसे होती है?
EMI = [P × R × (1+R)^N] / [(1+R)^N - 1], जहां P = Principal amount, R = Monthly interest rate (Annual rate/12/100), और N = Tenure in months। हर EMI में principal और interest दोनों होते हैं, शुरू में interest ज्यादा होता है।
Loan tenure बढ़ाने से EMI कैसे कम होती है?
लंबी tenure में वही amount ज्यादा महीनों में बंटता है, इसलिए monthly EMI कम होती है। लेकिन ध्यान रहे कि total interest काफी बढ़ जाता है। जैसे ₹50 लाख के loan पर 20 साल में 30 साल से लगभग ₹25-30 लाख ज्यादा interest देना पड़ता है।
Floating rate और fixed rate में कौन सा बेहतर है?
Floating rate RBI की repo rate के साथ बदलती है और आमतौर पर fixed से 1-2% कम होती है। अगर आप expect करते हैं कि rates गिरेंगी तो floating लें। Fixed rate predictable EMI देती है लेकिन थोड़ी महंगी होती है। ज्यादातर लोग floating लेते हैं।
Prepayment और foreclosure में क्या अंतर है?
Prepayment में आप EMI के अलावा extra amount principal में जमा करते हैं जिससे tenure या EMI कम होती है। Foreclosure में आप पूरा outstanding loan एक साथ चुका देते हैं। Floating rate loans पर banks prepayment charges नहीं ले सकते।
EMI bounce होने पर क्या होता है?
EMI bounce पर bank ₹500-750 penalty charge करते हैं और यह आपके CIBIL score को नुकसान पहुंचाता है। लगातार bounce से loan default हो सकता है। अगर EMI भरना मुश्किल हो तो bank से tenure बढ़वाने या restructuring की बात करें।