क्लोजिंग लागत कैलकुलेटर
मुफ्त क्लोजिंग लागत कैलकुलेटर। खरीदार और विक्रेता क्लोजिंग लागत का अनुमान लगाएं, शीर्षक, मूल्यांकन, पंजीकरण शुल्क और स्थानांतरण कर सहित।
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₹323,900
3.2% घर की कीमत का
₹2,000,000
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₹2,323,900
डाउन + क्लोजिंग
₹8,000,000
क्लोजिंग लागत विवरण
ऋण उत्पत्ति शुल्क₹80,000
मूल्यांकन शुल्क₹500
क्रेडिट रिपोर्ट₹50
टाइटल खोज₹50,000
टाइटल बीमा₹50,000
सर्वेक्षण शुल्क₹500
वकील शुल्क₹1,000
पंजीकरण शुल्क₹300
घर निरीक्षण₹400
कीट निरीक्षण₹150
प्रीपेड बीमा (1 वर्ष)₹35,000
प्रीपेड संपत्ति कर (3 महीने)₹50,000
प्रीपेड ब्याज (15 दिन)₹16,000
एस्क्रो जमा (2 महीने)₹40,000
कुल क्लोजिंग लागत₹323,900
₹10,000,000 घर के लिए सामान्य क्लोजिंग लागत सीमाएं
| प्रकार | कम | औसत | उच्च |
|---|---|---|---|
| खरीदार लागत | ₹200,000 | ₹350,000 | ₹500,000 |
| विक्रेता लागत | ₹600,000 | ₹800,000 | ₹1,000,000 |
| पुनर्वित्त लागत | ₹150,000 | ₹200,000 | ₹300,000 |
क्लोजिंग लागत कम करने के तरीके
- तुलना करें: कई ऋणदाताओं से उद्धरण प्राप्त करें
- बातचीत करें: कुछ शुल्क बातचीत योग्य हैं (उत्पत्ति, शीर्षक)
- विक्रेता क्रेडिट: विक्रेता से कुछ खरीदार लागत कवर करने को कहें
- ऋणदाता क्रेडिट: उच्च दर = कम अग्रिम लागत
- नो-क्लोजिंग-कॉस्ट बंधक: ऋण में शामिल (उच्च दर)
- टाइटल कंपनियों की तुलना करें: कीमतें काफी भिन्न होती हैं
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अंतिम अपडेट: जनवरी 2026
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में प्रॉपर्टी खरीदने पर कुल खर्च कितना आता है?
प्रॉपर्टी खरीदने पर कुल अतिरिक्त खर्च आमतौर पर 7-12% होता है। मुख्य खर्च: स्टाम्प ड्यूटी (3-8%, राज्य के अनुसार), रजिस्ट्रेशन चार्ज (1%), GST (अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर 5%), ब्रोकरेज (1-2%), और कानूनी शुल्क। उदाहरण: महाराष्ट्र में 1 करोड़ की प्रॉपर्टी पर स्टाम्प ड्यूटी 5-6 लाख और रजिस्ट्रेशन 30,000 रुपये होगा।
स्टाम्प ड्यूटी क्या है और यह राज्यों में कितनी अलग होती है?
स्टाम्प ड्यूटी राज्य सरकार को दिया जाने वाला टैक्स है जो प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर लगता है। दरें राज्य के अनुसार: महाराष्ट्र में 5-6%, दिल्ली में 4-6%, कर्नाटक में 5%, UP में 7%, राजस्थान में 5-6%। महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्रेशन पर अधिकांश राज्यों में 1-2% की छूट मिलती है। PMAY योजना के तहत पहली बार घर खरीदने वालों को भी छूट मिल सकती है।
रेडी-टू-मूव और अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी में GST का क्या फर्क है?
रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी पर GST नहीं लगता (सिर्फ स्टाम्प ड्यूटी)। अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर: अफोर्डेबल हाउसिंग (45 लाख तक) पर 1% GST, बाकी पर 5% GST (इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना)। इसलिए कभी-कभी रेडी प्रॉपर्टी सस्ती पड़ती है। हालांकि, अंडर-कंस्ट्रक्शन में पेमेंट किश्तों में होता है जिससे फंड मैनेजमेंट आसान रहता है।
प्रॉपर्टी बेचने पर कौन-कौन से खर्च आते हैं?
बेचने पर मुख्य खर्च: TDS (प्रॉपर्टी 50 लाख से ज्यादा हो तो खरीदार 1% TDS काटता है), कैपिटल गेन टैक्स (शॉर्ट टर्म 30% या लॉन्ग टर्म 20% इंडेक्सेशन के साथ), ब्रोकरेज (1-2%), और लोन प्रीक्लोजर चार्ज। 2 साल से ज्यादा होल्डिंग पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। Section 54 के तहत नई प्रॉपर्टी खरीदने पर टैक्स बचा सकते हैं।
होम लोन लेते समय कौन से अतिरिक्त चार्ज लगते हैं?
होम लोन के साथ जुड़े चार्ज: प्रोसेसिंग फी (लोन अमाउंट का 0.5-1%), लीगल और टेक्निकल वेरिफिकेशन फी (5,000-15,000 रुपये), MODT/CERSAI चार्ज, और प्रीपेमेंट/फोरक्लोजर चार्ज (फ्लोटिंग रेट पर शून्य)। कुछ बैंक फेस्टिव ऑफर में प्रोसेसिंग फी माफ करते हैं। EMI बाउंस पर 500-1000 रुपये पेनल्टी लगती है।